उत्तर प्रदेश के संभल पिछले दो दिनों में 15 बंदरों की मौत से दहशत, लोगों का शक Coronavirus पर
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के संभल जिले के एक गांव में पिछले दो दिनों में 15 बंदरों की मौत से दहशत फैल गई है। लोगों को डर है कि बंदरों की मौत की वजह कहीं कोरोना वायरस न हो, क्योंकि इस सप्ताह कोरोना वायरस से अमेरिका के ब्रूक्स चिड़ियाघर में एक बाघ की मौत हो गई थी। बरेली में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) से ऑटोप्सी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, पशु चिकित्सकों को संदेह है कि पवनसा गांव के बंदर निमोनिया के शिकार हो सकते हैं।
आईवीआरआई के सूत्रों के मुताबिक, शुरूआती परीक्षणों से पता चलता है कि मृत बंदरों में लिवर और किडनी में संक्रमण था। उन्होंने इसके लिए दूषित पानी के सेवन को जिम्मेदार ठहराया। पानी में शायद कीटनाशकों का उपयोग कृषि के लिए किसानों द्वारा किया गया था। एक पशु चिकित्सक, प्रकाश नीर ने कहा कि बंदरों ने कुछ जहरीला पदार्थ खाया होगा। उन्होंने कहा कि मृत बंदरों के फेफड़े सूजे हुए थे और उनके शरीर के तापमान से पता चला कि उन्हें तेज बुखार था।
इस बीच प्रदेश में कोरोना वायरस के 24 ताजा मामले सामने के आने के साथ संक्रमित मामलों की कुल संख्या बढ़कर 332 हो गई। स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से जारी बुलेटिन में बताया गया कि 24 ताजा मामले सामने आए हैं जिनमें से 12 तबलीगी जमात से जुड़े हैं। राज्य में अब तक 176 जमाती सदस्यों में कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामले पाए गए हैं। 27 लोग स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं।
बुलेटिन में कहा गया कि आगरा में 10, शामली, बस्ती, फिरोजाबाद में तीन-तीन, लखनऊ और बुलंदशहर में दो-दो आजमगढ़ में एक मामला सामने आया है। प्रमुख सचिव अमित मोहन प्रसाद ने बताया कि 6073 नमूने प्रयोगशाला में भेजे गए थे जिसमें से 5595 मामले नेगेटिव निकले और 314 मामले कोरोना पॉजिटिव आए। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की हेल्पलाइन 180 0180 5145 पर लगातार चिकित्सकीय सलाह दी जा रही है। लेकिन आज से 100 लोगों का एक ऐसा समूह तैयार किया गया है जो मानसिक तनाव के शिकार लोगों की काउंसलिंग कर सकता है।
हेल्पलाइन नंबर मिलाने पर ऐसे लोगों की बात काउंसलर से कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में संक्रमित लोगों के पृथकवास के लिए 10 हजार बिस्तर तैयार हैं। अब इन्हें विस्तारित करने की रणनीति अपनाई गई है। इसके तहत अस्पताल के बगल किसी लॉज या हॉस्टल को लिया जाएगा और वहां लक्षण विहीन लोगों को रखा जाएगा ताकि गंभीर मरीजों के लिए पृथकवास वाले बिस्तरों को खाली कराया जा सके।
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